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पटना में एलपीजी संकट के बीच पीएनजी की ओर रुझान, तेजी से बढ़ रहे कनेक्शन; प्रशासन चला रहा विशेष अभियान

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पटना। बिहार में इन दिनों रसोई गैस यानी एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच राजधानी पटना में एक नया विकल्प तेजी से उभर कर सामने आ रहा है—पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी)। एलपीजी की कमी के चलते अब बड़ी संख्या में लोग पीएनजी कनेक्शन की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे शहर में इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
राज्य सरकार और प्रशासन भी इस बदलाव को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता देने और लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन जिलों में गैस आपूर्ति का ढांचा तैयार है, वहां लोगों को जल्द से जल्द कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।
बताया गया है कि बिहार के करीब 18 जिलों में पीएनजी का बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद है। ऐसे क्षेत्रों में जहां घरेलू कनेक्शनों की संख्या 75 हजार से अधिक है, वहां 24 घंटे के भीतर नया कनेक्शन दिया जा सकता है। वहीं, जिन इलाकों में 70 हजार से ज्यादा उपभोक्ता हैं, वहां एक सप्ताह के भीतर कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए कनेक्शन शुल्क में 500 रुपये की छूट भी दी जा रही है।
राजधानी पटना में इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों, खासकर दानापुर इलाके में अपार्टमेंट्स में शिविर लगाकर मौके पर ही पीएनजी कनेक्शन दिए जा रहे हैं। शनिवार को भी सात अपार्टमेंट्स में कैंप आयोजित किए गए, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन कर तुरंत कनेक्शन प्राप्त किया।
इन शिविरों में प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है। इच्छुक उपभोक्ताओं से केवल आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड और पते का प्रमाण लिया जाता है, और नामांकन के साथ ही गैस मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। मामूली शुल्क लेकर तत्काल कनेक्शन देना इस अभियान की खासियत बन गया है, जिससे लोगों को लंबी प्रतीक्षा से राहत मिल रही है।
इस अभियान में देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की गैस कंपनी GAIL भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही है। कंपनी का लक्ष्य हर महीने हजारों नए उपभोक्ताओं को जोड़ने का है। दानापुर अनुमंडल क्षेत्र में लगाए गए शिविरों के दौरान ही करीब 90 नए उपभोक्ताओं को कनेक्शन प्रदान किया गया, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है।
आंकड़ों के अनुसार, पटना में अब तक 30 हजार से अधिक घरों में पीएनजी कनेक्शन दिया जा चुका है। केवल पिछले कुछ दिनों में ही सैकड़ों नए उपभोक्ताओं ने इस सुविधा को अपनाया है। शहर में लगभग 21 हजार ऐसे आवासीय भवन हैं, जहां गैस पाइपलाइन पहले से पहुंच चुकी है। इन भवनों में रहने वाले लोगों को आसानी से और जल्द कनेक्शन दिया जा सकता है, जिसके लिए प्रशासन अलग-अलग चरणों में कैंप लगाने की योजना बना रहा है।
पीएनजी के प्रति बढ़ते रुझान के पीछे इसकी कई व्यावहारिक और सुरक्षा से जुड़ी खूबियां भी हैं। एलपीजी सिलेंडर की तुलना में पीएनजी अधिक सुविधाजनक मानी जाती है, क्योंकि इसमें गैस खत्म होने की समस्या नहीं होती। चूंकि यह पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों तक पहुंचती है, इसलिए सिलेंडर बदलने या बुकिंग की झंझट से छुटकारा मिल जाता है।
सुरक्षा के लिहाज से भी पीएनजी को बेहतर विकल्प माना जा रहा है। यह गैस हवा से हल्की होती है, इसलिए यदि किसी कारणवश रिसाव होता भी है, तो यह ऊपर की ओर फैल जाती है और जमीन पर जमा नहीं होती। इससे आग लगने या विस्फोट का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके विपरीत एलपीजी हवा से भारी होती है और रिसाव की स्थिति में नीचे फैलकर अधिक जोखिम पैदा करती है।
आर्थिक दृष्टि से भी पीएनजी लाभकारी साबित हो रही है। इसमें उपभोक्ता को केवल उतनी ही गैस का भुगतान करना होता है, जितनी वह उपयोग करता है। जबकि एलपीजी में पूरा सिलेंडर खरीदना अनिवार्य होता है, चाहे उसकी जरूरत कम ही क्यों न हो। इस कारण पीएनजी को अधिक किफायती और पारदर्शी व्यवस्था माना जा रहा है।
पर्यावरण के लिहाज से भी पीएनजी को बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे उत्सर्जन कम होता है और यह अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन है, जिससे शहरी प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।
एलपीजी की मौजूदा किल्लत ने जहां लोगों की परेशानी बढ़ाई है, वहीं पीएनजी के विस्तार के लिए एक अवसर भी पैदा किया है। प्रशासन और गैस कंपनियां इस अवसर का लाभ उठाते हुए अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को इस नई व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
आने वाले समय में यदि यह अभियान इसी गति से चलता रहा, तो संभावना है कि पटना समेत अन्य शहरों में भी पीएनजी का दायरा तेजी से बढ़ेगा और यह रसोई गैस के पारंपरिक विकल्प के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना लेगा। फिलहाल राजधानी में चल रहा यह बदलाव न केवल लोगों को सुविधा दे रहा है, बल्कि ऊर्जा उपयोग के एक नए और सुरक्षित मॉडल की ओर भी संकेत कर रहा है।

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